Motivational Story In Hindi – स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानी 2024

admin
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Motivational Story In Hindi दोस्तो खुद के दम पर जीतने वालों को मेरा सलाम! देखा जाए तो ये कहानी नहीं है यह पोस्ट एक किताब की समरी है जिसका नाम Fear Not Be Strong (फियर नॉट बी स्ट्रांग) के आठ वें चेप्टर एजुकेशन इस मास्टर की किताब में लिखी बातो को समझने का प्रयत्न है।

स्वामी विवेकानंद जी ने Education और पढ़ाई को बहुत गहरे और प्रैक्टिकल ऐंगल से समझाया है। ये पोस्ट Motivational Story In Hindi आपको न केवल आज बल्कि पूरे करियर मदद करेगा।

Motivational Story In Hindi स्वामी विवेकानंद की प्रेरक कहानी

स्वामीजी कहते है, दुनिया का मूल तत्व है वाइब्रेशन उसी तरह Education का मूल तत्व है Concentration यानी एकाग्रता, एजुकेशन में कॉन्सन्ट्रेशन को लेकर स्वामीजी कहते हैं मुझे दोबारा पढ़ने का मौका मिले तो पहले मैं फैक्ट याद नहीं करुगा बल्कि मैं ध्यान और ज्यादा विकसित करने पर ध्यान दुगा।

Motivational Story In Hindi

ध्यान और वैराग्य से मन स्थिर होता है बुद्धि एक दिशा में तीव्र होकर काम करती है फिर मैं पर्फेक्ट बुद्धि से सारे फैक्ट्स को कनेक्ट करूंगा और याद करने की कोशिश करूंगा।

स्वामीजी कहते है की बिना Concentration के किसी भी प्रकार की नॉलेज का अस्तित्व नहीं है अपने काम को अपनी पढ़ाई को अपनी ट्रेनिंग का हिस्सा बनाओ जब भी आप काम करने बैठो तो सबसे पहले दो इंटेंशन सेट करो।

  • इंटेंशन नंबर वन में अगले 30 मिनट जो भी करूंगा संपूर्ण ध्यान से करूंगा।
  • दूसरा, मैं आने जाने वाले सभी विचार और डिस्ट्रैक्शन के प्रति सचेत रहूंगा।

महीनो या चाहे सालों लगे पर काम करने से पहले इस तरह से दो इंटेंशन सेट करो, जब तक ध्यान और आगे से काम करना आपका स्वभाव ना बन जाए आप कहोगे की हम तो पढ़ना चाहते हैं, इस तरह की ट्रेनिंग से क्या लाभ होगा?

स्वामी जी बहुत अच्छा जवाब देते हैं इच्छा शक्ति जीस ट्रेनिंग से इंसान अपनी इच्छाशक्ति को कंट्रोल करना सीखता है यानी जिस ट्रेनिंग के द्वारा इंसान इच्छाशक्ति से अपनी भावनाएं विचार और कर्मों को कंट्रोल करना सीखता है उनका सदुपयोग करना सीखता है।

स्वामी विवेकानंद के बारे में कुछ प्रसिद्ध कहानियां

उदाहरण के माध्यम से जानते है की बेहतरीन फुटबॉल खेलने के लिए भावनाओं पर काबू करके मन और शरीर को एकाग्र करना पड़ता है, साइंस पढ़ने के लिए भी मन को शांत करके बुद्धि को कॉन्सेप्ट पर एकाग्र करना है।

दोनों ही ट्रेनिंग में हम इच्छाशक्ति का प्रयोग करना सीखते हैं इसलिए दोनों ही एजुकेशन है।

स्वामी विवेकानंद जी के अनुसार कुछ भी आधे मन से मत करो खुद को बार बार याद दिलाओ की पूरा जीवन ट्रेनिंग का ही हिस्सा है मैं जो भी कर रहा हु, मैं अपने विचार, शब्दों और शरीर को कंट्रोल करना सीख रहा हु मैं इच्छा और ध्यान की शक्ति विकसित कर रहा हु।

आपने भी कभी सोचा होगा की कैसे वैज्ञानिक अविष्कार करते हैं कैसे Sportman अपने फॉर्म में आकर गजब का खेल दिखाते हैं कैसे कुछ डॉक्टर्स मरीज को देखते ही बिमारी समझ जाते हैं।

Motivational Story In Hindi स्वामी विवेकानंद स्टोरी इन हिंदी

स्वामीजी कहते हैं, एजुकेशन इसका मिनिफेस्ट एक्शन ऑफ परफेक्शन ऑलरेडी Presentation में इच्छा शक्ति के प्रयोग से जब भावनाएं विचार और कर्म एकाग्र हो जाते हैं तो अंदर विराजमान शक्ति कई रूपों में प्रकट हो जाती है।

दोस्तों, आप अपने चारों तरफ नई Technology बड़े ब्रिजेस और विभिन्न कंपनी देख रहे हो क्या ये सब इन्फॉर्मेशन और किताबी ज्ञान के कारण संभव है? नही सारी उपलब्धि और डेवलपमेंट कल्पना, शक्ति और इच्छा शक्ति का कमाल है।

स्वामीजी कहते हैं, जब यह आंतरिक शक्ति मैटर पर केंद्रित होती है, तब मैटर विकसित होता है यानी मैटीरियल डेवलपमेंट होता है। जब ये शक्ति विचारों पर केंद्रित होती है तब प्रज्ञा यानी Intellect विकसित होता है।

इस बात को समझने के लिए स्वामीजी कहते हैं कि सचेत रहने से या प्रज्ञा विकसित की जा सकती है कैसे लर्निंग टू कंट्रोल द माइंड थ्रू डिस्क्रिमिनेशन स्टिम्यूलेट थॉट दोस्तों यहां डिस्क्रिमिनेशन शब्द महत्वपूर्ण है।

इस बात को गहराई से समझो जब आप विचारों के प्रकट होने पर सचेत हो जाते हैं कि मुझे गुस्से वासनाओं से भरी विचार प्रकट हो रहे हैं और आप ही अंतर करने लगते हैं कि यह केवल विचार है।

स्वामीजी कहते हैं कि इस तरह खुद को विचारों से अलग देखने से इंटलेक्ट या प्रज्ञा विकसित होती है। इंटलेक्ट विकसित होने से क्या होगा? इंटलेक्ट विकसित होने से आप हर प्रकार की भावनाओं और विचारों को नई दिशा देकर इनकी शक्ति प्रयोग कर सकते हैं।

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हम पल में हाई इन टेक्स्ट होता है ये भावनाओं में नहीं रहते कहानियों में से फैक्ट छानकर नियमों को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं तो उसको प्रैक्टिकल नॉलेज, पानी का स्वयं को ज्ञान और शक्ति से भरने का स्वामी जी का बहुत सीधा और कारगर तरीका है।

स्वामी विवेकानंद जी द्वारा लिखी यह बाते अगर आप समझ जाते है जिसके बाद आपकी पर्सनैलिटी जड़ से ही बदल जायेगी।

दोस्तो स्वामी विवेकानंद जी ने युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन देने के लिए बहुत जरूरी बाते कही है अगर आप चाहे तो उनकी किताब पढ़ सकते है।

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