Best Motivational Story In Hindi 2024 – गुरु शिष्य की अदभुद कहानी

admin
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Motivational Story In Hindi गुरु और शिष्य के रिश्ते में सिर्फ ज्ञान का आदान प्रदान नहीं होता बल्कि एक गुरु अपने शिष्य को जीवन में सफलता की दिशा में प्रेरित करने में मदद करता है। इस रिश्ते में अटूट विश्वास, समर्पण, और सम्मान का स्थान सबसे उपर होता है जो शिष्य के जीवन में सफलता की ऊँचाइयों को छूने में मदद करता है।

गुरु शिष्य का यह संबंध एक भावना से भरा होता है जिसमें गुरु अपने अनुभव और ज्ञान से शिष्य को मार्गदर्शन देने में सहायता करता है। दोस्तो गुरु शिष्य की यही अटूट विश्वास भावना समझने के लिए आज हमने आपके लिए Motivational Story In Hindi पोस्ट लिखी है।

Motivational Story In Hindi गुरु शिष्य की कहानी

Motivational Story In Hindi एक बार की बात है। एक जंगल में एक गुरुकुल था। उस गुरुकुल में काफी सारे बच्चे पढ़ने आया करते थे तो हर दिन की तरह एक दिन गुरूजी अपने सारे शिष्यों को पढ़ा रहे थे। सभी शिष्य वहाँ पर ध्यान से पढ़ रहे थे और गुरु जी की बातें ध्यान से सुन रहे थे।

Motivational Story In Hindi

आए हुए सभी विद्यार्थी में एक विद्यार्थी वहाँ पर ऐसा था जो बिल्कुल भी पढ़ नहीं रहा था, ना ही गुरूजी की एक भी बात उसे समझ में आ रही थी। ये देखकर गुरु जी को उस लड़के पर काफी ज्यादा गुस्सा आया।

गुरुजी ने उस लड़के को अपने पास बुलाया और कहा, बेटा अपनी हथेली मुझे दिखाओ! उस लड़के ने फिर अपनी हथेली को गुरु जी को दिखाया फिर गुरूजी ने उस लड़के की हथेली को देखकर ये बोला बेटा तुम एक काम करो, गुरुकुल को छोड़कर घर वापस चले जाओ क्योंकि तुम यहाँ पर अपना समय बर्बाद करने के अलावा और कुछ भी नहीं कर रहे हो।

गुरुजी ने कहा, मैं ऐसा इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि तुम्हारे भाग्य में विद्या है ही नहीं फिर उस लड़के ने बोला क्यों गुरु जी क्या हुआ? गुरु जी ने बोला तुम्हारे हाथ में विद्या की रेखा है ही नहीं।

यह सब होने के बाद फिर गुरूजी ने वहाँ पर बैठे एक होशियार विद्यार्थी को बुलाया और उसके हथेली को दिखाते हुए बोला देखो इसे कहते है विद्या रेखा जो तुम्हारे हाथ में नहीं है और जिसके हाथों में विद्या रेखा नहीं होती है वो कभी भी विद्या हासिल नहीं कर पाता है।

Short Motivational Story In Hindi

Motivational Story In Hindi इसलिए अपनी कीमती समय को यहाँ पर बर्बाद मत करो और यहाँ पर से चले जाओ और अपने लिए कोई दूसरा काम देखो ये बात सुनकर उस लड़के को काफी गुस्सा आ गया।

उस लड़के ने तुरंत अपनी जेब से चाकू निकाला और चाकू की मदद से अपने हथेली में वैसे ही विद्या रेखा बना डाला जैसा उस तेज़ विद्यार्थी के हथेली में था। उस लड़की का हाथ पूरा खून से लथपथ हो गया।

लड़के की यह हरकत देखकर गुरूजी और जीतने भी विद्यार्थी वहाँ पर बैठे हुए थे वो काफी ज्यादा डर गए फिर उस लड़के ने गुरु जी को बोला लीजिये गुरु जी मैंने अपने हाथों में विद्या रेखा बना ली है जैसी इस तेजस्वी विद्यार्थी के हाथ में है।

विद्यार्थी ने कहा, क्या अब भी मुझे ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी? यह देखकर गुरु जी को अपनी गलती का एहसास हो गया और उन्होंने उस लड़के को गले लगा लिया फिर गुरूजी बोले, बेटा अब तुम्हें ज्ञान प्राप्त करने से कोई भी नहीं रोक सकता।

अपनी जिंदगी में तुम जरूर काफी आगे जाओगे क्योंकि जीस इंसान ने ये ठान लिया कि उसे अपनी जिंदगी में कुछ करना है तो वो आराम से अपने हाथ की रेखा और किस्मत दोनों को अपनी मेहनत से बदल सकता है।

 

जब वो विद्यार्थी आगे चलकर बड़ा हुआ तो पूरी दुनिया उसे महर्षि पाणिनि के नाम से जानने लगी और उन्हें व्याकरण का गुरु भी कहा जाता है।

आज 2700 साल बाद भी ऐसा व्याकरण कोई भी इतने अच्छे से नहीं लिख पाया है जिस तरह से 2700 साल पहले लिखा था इसलिए इनकी विद्या की तारीफ आज भी दुनिया के हर एक कोने में किया जाता है।

दोस्तो इस कहानी से मैं आपको ये बताना चाहता हूँ कि जीस इंसान ने ये ठान लिया कि इस अपनी ज़िन्दगी में कुछ हासिल करना है तो उसे दुनिया की कोई भी ताकत आगे बढ़ने से रोक नहीं सकती। क्योंकि मेहनत और लगन से वो इंसान सब कुछ पा सकते हैं जिसका आज वो सपने देख रहा है।

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आखिरी में इतना ही कहना चाहूंगा, दुनिया चाहे कुछ भी कहे, सबसे पहले अपने मन और अपने आप पर जीत हासिल कीजिए क्योंकि जो खुद से जीत गया उसे दुनिया की कोई भी ताकत हरा नहीं सकती क्योंकि जिंदगी खेलती भी उन्हीं के साथ है जो खिलाड़ी बेहतरीन होते हैं।

प्यारे दोस्तो दर्द सबका एक ही है मगर हौसले सबके अलग अलग है। कोई हताश होकर बिखर जाता है तो कोई संघर्ष करके निखर जाता है।

Motivational Story In Hindi कहानी की सिख

गुरु शिष्य कहानी Motivational Story In Hindi से हमें यह सिखने को मिलता है कि शिष्य अपने गुरु के मार्गदर्शन में रहकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करके सफलता प्राप्त करता है, जबकि गुरु अपने आदर्श शिष्य की सफलता में आनंद और संतुष्टि पाता है।

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