Great Moral Story In Hindi 2024 : अहंकार छोड़िये और सीखना शुरू कीजिए

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Moral Story In Hindi : अहंकार छोड़िये और सीखना शुरू कीजिए

इस ब्लॉग पर कई तरह की कहानियां जैसे Motivational StoryMotivational Story, Motal StoryMotal Story इत्यादि बहुत कहानी हमारे द्वारा लिखी गई है जिसे आप पढ़ सकते है। आज की इस पोस्ट में है आपके लिए लाए है बेहतरीन Moral Story In Hindi तो चलिए शुरू करते है बिना आपका समय खराब करते हुए।

Moral Story In Hindi : अहंकार छोड़िये और सीखना शुरू कीजिए

दोस्तो जैसे की आप सबको पता ही है की धरती पर जन्म लेने के साथ ही हमारे अंदर सीखने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है इसके साथ ही जैसे जैसे हम बड़े होते है वैसे वैसे सीखने की प्रक्रिया भी अपना विस्तार लेती जाती है, उमर बढ़ने के साथ जल्द ही हम उठना, बैठना, बोलना और चलना ये सब सीख लेते हैं।

जीवन के इस चक्र बड़े होने की प्रक्रिया के साथ ही कभी ऐसा समय भी आता है जब हमारा अहंकार हमसे अधिक बड़ा होने लग जाता है, जब हमारे साथ ऐसा कुछ होने लगता है तब हम अपना रास्ता भटक जाते है, हु जिन्दगी में सब कुछ उल्टा सीधा करने लग जाते है और तब हम सीखना छोड़कर गलतियां करने लगते हैं।

यह अंहकार हमारे सफलता प्राप्ति मार्ग को अवरूद्ध कर देता है इस बात को समझने के लिए मैंने एक बेहतरीन Moral Story In Hindi लिखी है मुझे लगता है इस कहानी की चर्चा यहाँ करना अच्छा होगा।

Moral Story In Hindi : अपने अन्दर का अहंकार छोड़िये और कुछ नया सीखे

बहुत समय पहले की यह बात है फ्रांस के महान विचारक अल्बर्ट कैलमेट नाम के विचारक एक बार संत गुरुजी से मिलने उनके घर गए। अल्बर्ट कैलमेट और संत दोनों में अलग अलग बहुत से विषयों पर चर्चा होने लगी। अल्बर्ट कैलमेट ने संत से कहा, मैंने गहन अध्ययन एवम अनुभव के द्वारा काफी ज्ञान प्राप्त किया है, किन्तु गुरुजी मैं कुछ और भी जानना चाहता हूं आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं?

गुरुजी को मालूम था कि अल्बर्ट कैलमेट अपने विषय के ज्ञानी है जिसकी वजह से उन्हें घमंड भी है। गुरुजी ने अंदर ही अंदर सोचा की सीधी बात करने से कोई काम नहीं बनेगा। इसलिए गुरुजी ने कुछ देर सोचने के बाद एक कोरा कागज उठाया और उसे अल्बर्ट कैलमेट के सामने रखा और बोले- ”यह अच्छी बात है कि तुम कुछ सीखना चाहते हो। पर मैं कैसे समझूं कि तुमने क्या-क्या सीख लिया है और क्या-क्या नहीं सीखा है।

अल्बर्ट कैलमेट से कहा तुम ऐसा करो कि जो कुछ भी तुमने सीखा है तुम जो जानते हो और जो नहीं जानते हो, उन दोनों के बारे में इस कोरे कागज पर लिख दो। क्योको जो तुम पहले से ही जानते हो उसके बारे में तो चर्चा करना बिल्कुल ही व्यर्थ है और हा जो तुम नहीं जानते उस पर ही चर्चा करना हमारे लिए ठीक रहेगा।

गुरुजी की द्वारा बताई गई बात एकदम सरल थी, लेकिन अल्बर्ट कैलमेट के लिए बहुत ही मुश्किल। उनका ज्ञानी होने का अभिमान चकना चूर हो गया। अल्बर्ट कैलमेट आत्मा और परमात्मा जैसे विभिन्न विषय के बारे में तो बहुत जानते थे, लेकिन तत्व-स्वरूप एवम भेद-अभेद के बारे में उन्होंने कुछ सोचा तक नहीं था।

गुरुजी की यह बात सुनकर अल्बर्ट कैलमेट सोच में पड़ गए। बहुत देर सोच विचार के बाद भी जब उन्हें कुछ समझ में नहीं आया तो अंत में उन्होंने वह कोरा कागज गुरुजी को वापस दे दिया और कहने लगे,श्रीमान मैं तो कुछ भी नहीं जानता आज आप जैसे महान गुरुजी ने मेरी आंखे खोल दी।

अल्बर्ट कैलमेट की विनम्रतापूर्वक कही गई इन बातो से गुरुजी बेहद प्रभावति हुए और बोले – ”ठीक है, अब मुझे लगता है कि तुमने जानने योग्य पहली बात जान ली है कि तुम कुछ नहीं जानते। यही होती है ज्ञान की प्रथम सीढ़ी है।

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गुरुजी ने कहा अब तुम्हें कुछ सिखाया और बताने लायक हो गए हो। अर्थात खाली बर्तन को भरा जा सकता है, किन्तु अहंकार से भरे बर्तन में बूंदभर ज्ञान भरना भी संभव नहीं।

Moral Of The Story

Moral Story In Hindi : ज्ञानी बनने के लिए जरूरी होता है कि मनुष्य ज्ञान को अपने अंदर पा लेने का संकल्प ले और वह केवल एक गुरू से ही स्वयं को न बांधे बल्कि उसे जहां कहीं भी अच्छी बात पता चले, उसे ग्रहण करें।

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